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अगले दो दिन बारिश, फिर पांच दिन खिलेगी धूप

अगले 48 घंटे हिमाचल में मानसून रहेगा सक्रिय, कई हिस्सों में बारिश के आसार
23 से 27 अगस्त तक प्रदेश में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान
मानसून सीजन में 1108 करोड़ की संपत्ति तबाह, 219 लोगों की मौत


शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून फिलहाल पूरी तरह विदा नहीं हुआ है। प्रदेश में अगले 48 घंटे तक मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक शुक्रवार और शनिवार को राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके बाद मानसून के कमजोर पड़ने के आसार हैं।

मौसम विभाग के अनुसार 23 से 27 अगस्त तक हिमाचल में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। यानी अगले दो दिनों की बारिश के बाद प्रदेशवासियों को लगातार कई दिनों तक राहत मिल सकती है। बारिश का दौर कमजोर पड़ने के बाद धूप खिलने से जनजीवन सामान्य होने की उम्मीद है।

हालांकि, अगले 48 घंटे के दौरान कुछ जिलों में मौसम अचानक करवट ले सकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

कांगड़ा में यलो अलर्ट, चार जिलों में तेज बारिश की चेतावनी

21 अगस्त को कांगड़ा जिले में तेज बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कांगड़ा में कुछ स्थानों पर मौसम खराब रहने और तेज बारिश की संभावना जताई है।

इसके अलावा कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन में भी तेज बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में स्थानीय स्तर पर बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों के लिए फिलहाल किसी विशेष अलर्ट की घोषणा नहीं की गई है।

पहाड़ी इलाकों में कम समय में तेज बारिश होने की स्थिति में स्थानीय नालों और खड्डों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में नदी-नालों के आसपास जाने से बचना और संवेदनशील मार्गों पर यात्रा के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होगा।

23 अगस्त से मौसम में आएगा बड़ा बदलाव

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 23 अगस्त से मानसून कमजोर पड़ सकता है। इसके बाद 23 से 27 अगस्त तक प्रदेश में मौसम के मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना है।

लगातार बारिश के बाद मौसम के साफ होने से उन इलाकों में भी राहत मिलने की उम्मीद है, जहां मानसून के कारण सड़कें, यातायात और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले दिनों हुई बारिश के असर को देखते हुए केवल मौसम साफ होने का मतलब यह नहीं है कि सभी जोखिम तुरंत खत्म हो जाएंगे।

भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क किनारे पहाड़ों से पत्थर गिरने और मलबा आने का खतरा मौसम साफ होने के बाद भी बना रह सकता है। इसलिए स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण रहेगा।

सामान्य से 7 फीसदी कम बारिश, फिर भी मानसून ने पहुंचाया बड़ा नुकसान

हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 7 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 20 अगस्त तक प्रदेश में सामान्य बारिश 543.6 मिलीमीटर होनी चाहिए थी, जबकि इस अवधि में 504.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।

यानी कुल बारिश सामान्य से कम रही, लेकिन अलग-अलग समय पर हुई तेज बारिश ने कई क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया। पहाड़ी राज्य होने के कारण कम अवधि में होने वाली अत्यधिक बारिश का असर सड़क, पुल, मकान, कृषि भूमि और दूसरी सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों पर पड़ता है।

यही वजह है कि बारिश का कुल आंकड़ा सामान्य से कम होने के बावजूद मानसून के दौरान नुकसान का आंकड़ा काफी बड़ा रहा है।

1108 करोड़ की संपत्ति तबाह, 219 लोगों की मौत

मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं और बारिश से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 1108 करोड़ रुपये की संपत्ति तबाह हो चुकी है, जबकि मानसून से जुड़ी घटनाओं में 219 लोगों की मौत हुई है।

बारिश के दौरान सबसे ज्यादा खतरा पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक बाढ़, सड़क धंसने और नदी-नालों के जलस्तर बढ़ने से पैदा होता है। ऐसे हादसे कई बार बेहद कम समय में होते हैं और लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिल पाता।

इसलिए मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट को केवल बारिश की सूचना के तौर पर नहीं, बल्कि संभावित जोखिम को लेकर चेतावनी के रूप में देखना जरूरी है।

किसानों और पर्यटकों के लिए भी अहम है मौसम का यह बदलाव

अगले कुछ दिनों में मौसम का साफ होना किसानों और बागवानों के लिए राहत लेकर आ सकता है। लगातार बारिश के बाद धूप निकलने से खेतों और बगीचों में कामकाज को गति मिल सकती है। वहीं पर्यटन गतिविधियों के लिए भी साफ मौसम अनुकूल माना जा रहा है।

हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है। किसी स्थान पर धूप होने के बावजूद दूसरे इलाके में बारिश हो सकती है। इसलिए पर्यटकों को खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी लेना जरूरी रहेगा।

अगले 48 घंटे सावधानी, फिर राहत की उम्मीद

फिलहाल मौसम का सबसे महत्वपूर्ण चरण अगले दो दिन हैं। कांगड़ा में यलो अलर्ट और कुल्लू, मंडी, शिमला व सोलन में तेज बारिश की चेतावनी को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

इसके बाद 23 से 27 अगस्त तक साफ मौसम का पूर्वानुमान हिमाचल के लिए राहत की खबर है। लेकिन मानसून से अब तक हुए भारी नुकसान को देखते हुए प्रशासन और आम लोगों के लिए चुनौती सिर्फ बारिश से बचाव तक सीमित नहीं है। क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करना भी उतना ही जरूरी है।

प्रदेश में मानसून भले ही कमजोर पड़ने की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन इस सीजन में 1108 करोड़ रुपये का नुकसान और 219 मौतें इसकी भयावहता को साफ तौर पर दिखाती हैं। ऐसे में अगले कुछ दिनों के साफ मौसम के बीच भी सतर्कता बनाए रखना जरूरी होगा।